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  • Short essay on peepal tree in English


    short essay on peepal tree in English

    After running for a few minutes, Bakha begins to slacken his pace.मैंने वो पीपल के पेड़ के बारे में बहुत कुछ सुना था, लेकिन कभी इसे देखने या इसके पास जाने का अवसर नहीं मिला था। बड़े-बुजुर्गों का कहना था कि यह पेड़ चमत्कारी पेड़ों में से एक है। दर्शनमात्र से ही मन के क्लेश दूर हो जाते हैं- अपूर्व शांति का अनुभव होता है। दादी बताती थी कि निर्मल मन से इस पेड़ की पूजा करने से आदमी की मनोकामना पूर्ण होती है। कपटी और छली लोगों से पेड़ नफरत करता है। इस सन्दर्भ में दादी रामचरित मानस की चौपाई भी पढ़ कर सुना देती थी, ‘‘निर्मल जन-मन सो मोहि पावा, मोहि कपट-छल –छिद्र न भावा‘‘ कहते हैं कि ‘‘कबिरा मन निर्मल भया जैसे गंगा के नीर, पाछे-पाछे हरि फिरत कहत कबीर-कबीर।‘ दादी को इस पीपल के पेड़ से इतना लगाव था कि बिछावन से उठकर उसी के ध्यान में मग्न हो जाया करती थी.The story radiates its author’s deep love for tradition as he, using the omniscient point of view, nostalgically evokes the Old World charm of oral storytelling by showcasing Nambi.Them concentrate on other important activities such as family background can be a great sense of humor about your work and show that you’ve understood.has an essay on Jeff's work, "The Atypicality of Jeff Hilson: Metrical Language and Modernist Pleasure".Mr kovach said: write your complete argument essay here mr kovach’s 7th and 8th period reading group discussion 48 views close this that causes too much stress because homework is 10 of your grade so that. मराठी Language; English Benefits of Peepal Tree in Hindi thanks for give benefit of tree. Trees are good sources of medicinal herbs, lace and raw materials for many industries. Bamboo is used for making mats, fence, basket and various items of handicrafts. Cane is another variety of tree which is used for many purposes. Furniture made of cane is highly artistic, beautiful and costly. Besides, they are good source of revenue for the state governments. In his 25 years working in India, the Colonel has only converted five Indians to Christianity, making his mission here a waste of time in Mrs. He surprises Bakha by touching his shoulder and asking him in broken Hindustani what’s wrong.This phenomenon can be explained due to the long leaf stalk and the broad leaf structure.Cultivated plants are prone to insect attacks which can decrease production of fruit worth of hundreds of million dollars.
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    • The Ficus religiosa tree is considered sacred by the followers of Hinduism, Jainism and Buddhism. Peepal trees are native to India and thrive in hot.
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    To be eligible for the 2017 prize, a book must have been published in the calendar year 2016, and written by an author born in the Caribbean or holding Caribbean citizenship.The other category winners receive a cash award of US$3,000. First, panels of distinguished judges select the best book in each of the three genre categories.It is said that peepal tree protects mankind from the evil eye and also keeps away dreadful dreams. They give us oxygen to breathe in and absorb the carbon dioxide. Wood is the most valuable product that trees give us. Lac is one of the most valuable forest products of India. Babul, Dhaora, Salat, Kulu and Bigasal are some varieties of trees which yield gum. It is grown in both tropical and sub-tropical regions. Interestingly, the sal tree is worshipped by Hindus and Buddhists. The leaves of the sal tree are ovate-oblong in shape.After the passing away of the Lord and the submerging of Dvaraka in the ocean, it was taken back to heaven; (3) samtanaka, a tree of wonder having leaves which promote fertility in men; its identification remains obscure; (4) haricandana or sandalwood (Santalum album) well known for its fragrance and cooling effect, it keeps evil spirits at bay; and (5) kalpa vrksa or kalpa taru, the tree of eternity which emerged as a result of the churning of the ocean of milk; it was lifted to Svarga by Indra, and is frequently mentioned in Sanskrit literature for its wish-fulfilling quality.मैं बेधड़क सुनाया करता था और मन ही मन प्रफुल्लित होता था। पेड़ मेरे घर के ठीक पिछवाड़े था .We are interested to hear from potential students interested in applying for a scholarship in collaboration with the English & Creative Writing Department.For more information on the 2015 application round please click here.दादी को नियमित इस पेड़ की पूजा करते देख गाँव की संभ्रान्त महिलाएँ भी पेड़ की पूजा-अर्चना करने आती रहती थीं। शनिवार के दिन पुरुषों को भी इसकी जड़ में जल डालते हुए अकसराँ देखा करते थे। दादी का कहना था कि शनिवार के दिन पीपल की जड़ में जल डालने से व्यक्ति शनि के प्रकोप से मुक्त हो जाता है। सोमवारी मौनी अमावस्या के दिन तो पेड़ के समीप महिलाओं की भीड़ जुट जाती थी। महिलाएँ सरोवर या नदी में स्नान करके मौन व्रत धारण कर इस पेड़ की परिक्रमा करके माथा टेकती थीं ताकि उनकी मनोकामना पूर्ण हो जाय। ऐसी मान्यता थी कि सच्चे मन से माथा टेकने से श्रद्धालुओं की मुरादें पूरी हो जाती थीं। मैं उन दिनों की बात कर रहा हूँ जब देश आजाद हुए महज कुछेक साल ही हुये थे। अंग्रेजियत की बू सारे महकमें में व्याप्त थी। पढ़ाई-लिखाई के मामले में स्कूल में शिक्षकगण विद्यार्थियों से कड़ाई से पेश आते थे। मुझे पास ही सराय स्कूल में भर्ती करा दिया गया था, लेकिन मैं स्कूल जाने के वक्त चौकी या खटिया के नीचे दुबक कर छुप जाया करता था। माँ तो छड़ी लेकर मुझे ढूँढ़ती थी, लेकिन दादी मेरे बचाव में झूठ बोलने में भी गुरेज नहीं करती थी। पकड़े जाने पर मैं जब माँ के हाथों पीटा जाता था तो दादी आकर छुड़ाती थी। मुझे पढ़ने-लिखने में बिल्कुल मन नहीं लगता था। हैदर मास्टर ( हेड पंडित ) बड़े ही कडि़यल मिजाज के थे। उन्हें अपनी अंगुलियों पर विद्यार्थियों के नाम याद रहते थे तथा सबों के माता-पिता तथा घरों से परिचित थे। हफ्ता भर स्कूल नहीं जाने से एक शिक्षक के साथ तीन लड़कों को मुझे खींचकर ले आने का आदेश दे डालते थे। ऐसी घटना मेरे साथ दो-तीन बार हुई। शिक्षक यमराज की तरह घर में घुसकर मुझे तलाशना शुरू कर देते थे। एक लड़का मेरा दोनों पैर, दूसरा लड़का दोनों हाथ और तीसरा मेरा बस्ता पकड़ झुलाते-गाते हुये स्कूल ले जाते थे। ये लड़के काफी आह्लादित होते थे और रास्ते भर ‘‘आलकी, पालकी, जै कन्हैया लाल की ‘‘गाते हुए मुझे स्कूल ले जाते थे। मैं पीछे सिर घुमाकर देखता था कि मास्टर साहब की छड़ी उनके हाथ में है कि नहीं। मेरे स्कूल पहुँचने के साथ दावानल की तरह खबर पूरे छात्रों के बीच फैल जाती थी। लड़के मुझे टंगे हुये देखने के लिए व्यग्र हो उठते थे। हैदर मास्टर के समक्ष मुझे बलि के बकरे की तरह खड़ा कर दिया जाता था। दो-चार झापड़ रसीद करने के बाद मुझे अपने वर्ग में जाने का हुक्म दे दिया जाता था। मैं भगवान से मन ही मन प्रार्थना करता था कि गिनती व पहाड़ा का वक्त जल्द आ जाय, क्योंकि छुट्टी होने के पूर्व गिनती व पहाड़ा साथ-साथ सबों को पढ़ाया जाता था। ‘‘एक से सौ तक गिनती एवं दो से बीस तक पहाड़ा सब को कंठस्थ होना चाहिये।‘‘ हैदर मास्टर का हुक्म था। इतना कुछ होने के बाबजूद मैं पढ़ने-लिखने में फिसड्डी था और पढ़ने-लिखने से जी चुराता था। घर तो घर आस-पड़ोस के लोगों के मन में धारणा बन गई थी कि अब मैं पढूँगा-लिखूँगा नहीं, बड़ा होकर भेड़-बकरी चराऊँगा। दादी को यह बात पचती नहीं थी। एक दिन उसने मुझे निर्मल-बार ( कपड़ा धोने का एक लोकप्रिय साबुन ) से नहला – धुलाकर तैयार कर दिया। अच्छे-अच्छे कपड़े पहना दिये और अपने साथ इसी पीपल के पेड़ के पास ले गयी। उसने नतमस्तक होकर प्रणाम करने के लिए कहा। मैं थोड़ी देर के लिये उपर पेड़ की चारों तरफ गौर से देखा और सुबुद्धि देने के लिए हाथ जोड़कर प्रार्थना की। दादी भी मन ही मन कुछ मन्नतें मांगी। मुझे ऐसा प्रतीत हुआ कि दादी ने मुझे इसी उद्देश्य से नहा-धुलाकर यहाँ लाया था। उस दिन से पता नहीं मेरे स्वभाव एवं आचरण में आश्चर्यजनक परिवर्तन होना प्रारम्भ हो गया। इसे ईश्वरीय शक्ति का परिणाम कहिये या कुदरत का करिश्मा मैं नियमित विद्यालय जाने लगा। यही नहीं पढ़ने-लिखने में भी मेरा मन लगने लगा। मैं बिस्तर से उठने के पश्चात तथा सोने से पहले दादी को हाथ पकड़कर सामने खड़ा कर देता और स्वयं दीवार से सटकर खड़ा हो जाता तथा एक से सौ तक गिनती और दो से बीस तक पहाड़ा सुना देता। दादी के चेहरे पर जो खुशी उस समय मैंने देखी, उसे शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता। जो मेरे आलोचक थे, वे अब मेरे प्रशंसक बन गये थे। घर में जो भी व्यक्ति आता, दादी गर्व के साथ मुझे उसके सामने खड़ा कर देती और गिनती-पहाड़ा सुनाने को कहती .

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    Book review headings should appear as follows: author (s), title, publisher, date of publication, total number of pages.The national tree of India, banyan is a very huge structure, long and deep roots and branches symbolize the country's unity.Indian sages and seers eulogized asvattha or peepal (Ficus religiosa), gular (Ficus glomerata), neem (Azadirachta indica), bel (Aegle marmelos, bargad or banyan (Ficus bengalensis), Asoka (Sereca indica), amala (Phyllanthus emblica), Arjuna (Terminalia Arjuna) and many other trees which acquired social and religious sanctity with the passage of time. Then one day I overheard them saying that they soak my leaves in water for days, scrape out the pulp gently and get out my sturdy venation, the arrangement pattern of my veins in the leaf.मिट्टी का दिया जलाना और धूप दिखाना भी वह कभी नहीं भूलती थी। प्रसाद में बताशे ले जाना उनका नियमित कार्य होता था। गाँव के कुछेक लड़के नंग-धड़ंग प्रसाद की लालच में पहुँच जाते थे। इन बच्चों में प्रसाद बाँटना दादी के लिए हर्ष की बात होती थी। दादी तीन जमात तक ही पड़ी थी, लेकिन रामायण-महाभारत, वेद-पुराण की कथाओं और प्रसंगों से भली-भाँति परिचित थीं। सूरदास, मीरा, जायसी, रसखान, रहीम, तुलसी, कबीर के दोहे तो उनकी जुबान पर बैठे हुये थे। कहते हैं न कि देखा-देखी पुण्य और देखा-देखी पाप!To avoid delays, please submit attachments as Microsoft Word Files or RTF (rich text format) only. For reviews of literary texts – no longer than 1, 000 words.Shirley wilson helfery cara u r a remarkable person u know it and it doesn’t janet henderson this is a truly remarkable and inspirational essay i only wish i.

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